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राजस्थान में पिछले दिनों हुये सियासी घमासान और सुलह के बाद प्रदेश कांग्रेस में एकबारगी शांति का माहौल बना हुआ है. लेकिन इस बीच गत एक महीने के दौरान पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने दो बड़ी मागें उठायी हैं.

इनमें एक मांग प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार से की गई तो दूसरी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से की गई है. पायलट की इन मांगों का प्रदेश की सियासत और आने वाले चुनावों में काफी असर पड़ने की संभावना है.

पहली डिमांड सीएम अशोक गहलोत की थी सचिन पायलट ने पिछले दिनों 2 सितंबर को सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखकर उनको चुनावी वादा याद दिलाया था. इस पत्र में पायलट ने राज्य सरकार की ओर से निकाली गई भर्तियों में एमबीसी समाज को 5 प्रतिशत आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिलने जिक्र किया था.

पायलट ने इसके साथ ही कहा था कि देवनारायण बोर्ड के तहत आने वाले विकास कार्य भी ठप्प पड़े हैं. पायलट ने इस पर खासा चिंता जाहिर की थी. पायलट ने इन दोनों मसलों पर राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की थी.